July 18, 2026

इतिहास रच गई गढ़वाली सिनेमा, ‘ढोली’ ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड, सीएम धामी ने दी बधाई

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इतिहास रच गई गढ़वाली सिनेमा, ‘ढोली’ ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फीचर फिल्म चुनी गई ‘ढोली’, उत्तरकाशी की असीगंगा घाटी में हुई थी शूटिंग

देहरादून। उत्तराखंड के लिए यह ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है। पहली बार किसी गढ़वाली फीचर फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में गढ़वाली फिल्म ‘ढोली’ को सर्वश्रेष्ठ गढ़वाली फीचर फिल्म का सम्मान मिला है। फिल्म के निर्माता सुनील नायक और निर्देशक दिनेश भोंसले को रजत कमल के साथ दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। इस उपलब्धि ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, गढ़वाली भाषा और क्षेत्रीय सिनेमा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

करीब 85 मिनट की यह फिल्म गढ़वाल के पारंपरिक ढोल वादकों (ढोली) और उनके परिवार के संघर्ष पर आधारित है। फिल्म समाज के उस विरोधाभास को उजागर करती है, जहां धार्मिक अनुष्ठानों, शुभ अवसरों और लोक परंपराओं में ढोल की धुन को सम्मान दिया जाता है, लेकिन उसे बजाने वाले कलाकार को बराबरी का सम्मान नहीं मिलता। फिल्म इसी सोच को संवेदनशील ढंग से चुनौती देती है और कला के साथ कलाकार के सम्मान का संदेश देती है।
फिल्म की शूटिंग सितंबर 2023 में उत्तरकाशी जिले की असीगंगा घाटी के नाल्ड गांव और आसपास के क्षेत्रों में की गई थी। पहाड़, खेत, पारंपरिक घर, गांव का प्राकृतिक परिवेश और स्थानीय जीवनशैली फिल्म की कहानी का अभिन्न हिस्सा हैं। फिल्म में उत्तराखंड के कई स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है, जिससे गढ़वाली संस्कृति और लोकजीवन का वास्तविक स्वरूप पर्दे पर उभरकर सामने आया है।

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फिल्म की कहानी एक ऐसे ढोली परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी कई पीढ़ियां पारंपरिक ढोल बजाकर आजीविका चलाती हैं। पिता का संघर्ष और समाज से मिले अपमान को देखकर उसका बेटा संकल्प लेता है कि वह अपनी कला को गांव की सीमाओं से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाएगा। कठिन परिश्रम के बाद वह सफलता हासिल करता है और जब अपने गांव लौटता है तो वही समाज, जिसने कभी उसके परिवार की उपेक्षा की थी, सम्मान के साथ उसका स्वागत करता है। फिल्म का मूल संदेश है कि कला और कलाकार दोनों का सम्मान समान रूप से होना चाहिए।

फिल्म में केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि गढ़वाल की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक वाद्ययंत्र, रीति-रिवाज, सामाजिक सोच, स्थानीय बोली और ग्रामीण जीवन को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि ‘ढोली’ को उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल किया जा रहा है।

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राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से पहले भी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी थी। वर्ष 2024 के कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने वाली यह उत्तराखंड की एकमात्र फिल्म थी। वहां भी इसकी कहानी, अभिनय और लोक संस्कृति के प्रभावशाली चित्रण की व्यापक सराहना हुई थी।

फिल्म के संगीत को प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की आवाज ने विशेष पहचान दी है।

लोकसंगीत से सजी फिल्म के गीत कहानी की भावनाओं को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। उत्तराखंड के दर्शकों के बीच नेगी की लोकप्रियता ने फिल्म के प्रभाव को और मजबूत किया।
फिल्म के निर्माता सुनील नायक हैं, जबकि निर्देशन दिनेश भोंसले ने किया है। कहानी के विस्तार, हिंदी संवाद और कार्यकारी निर्माता की जिम्मेदारी शिशिर कृष्ण शर्मा ने निभाई। मूल कहानी और गढ़वाली संवादों का अनुवाद डॉ. नंदकिशोर हटवाल ने किया। छायांकन अभिनव गंधर्व और शेख काइजर, संपादन एवं सह-निर्देशन वीरेन्द्र घरसे, कला निर्देशन अतुल विश्नोई, वेशभूषा गायत्री टम्टा, मेकअप पूजा भंडारी तथा प्रोडक्शन प्रबंधन राजेश कारेकर ने संभाला।
फिल्म में मुख्य भूमिका मोहित घिल्डियाल ने निभाई है। उनके साथ दीपा देऊपा, रमेश नौडियाल, सतीश धौलाखंडी, सोनिया गैरोला, नीरज नेगी, अतुल रावत, सुशील पुरोहित, धीरज रावत, जसपाल राणा, आनंद राणा, संजय बडोनी, सुनील सिंह, तन्मय लोहानी, मास्टर ऋषभ, अनिल जखमोला, तनुज शर्मा, प्रेम हिंदवाल और पंकज डंगवाल सहित उत्तरकाशी के अनेक स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है।

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धामी सरकार की फिल्म नीति का मिला लाभ

उत्तराखंड में लागू नई फिल्म नीति के बाद प्रदेश में फिल्म निर्माण का माहौल लगातार बेहतर हुआ है। राज्य सरकार ने शूटिंग की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया, स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को अवसर देने के साथ फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराईं। प्रदेश की प्राकृतिक लोकेशन, प्रशासनिक सहयोग और फिल्म-अनुकूल वातावरण के कारण उत्तराखंड राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं की पसंद बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में बनी ‘ढोली’ का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राज्य की फिल्म नीति—दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

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