August 28, 2026

बड़ी खबर:16 करोड़ के पुल मामले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन

0
IMG-20260807-WA0211

16 करोड़ के पुल मामले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन

31 जुलाई को क्षतिग्रस्त हुआ था नंदा की चौकी पुल का एप्रोच रोड, प्रारंभिक जांच में तकनीकी लापरवाही मिलने पर PWD के तीन इंजीनियर निलंबित


देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर 16 करोड़ रुपये की लागत से बने नए पुल के एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। 31 जुलाई 2026 को भारी बारिश के दौरान पुल का एप्रोच रोड धंसने और क्षतिग्रस्त होने के बाद शासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे। अब प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और अधिकारियों की लापरवाही सामने आने पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।


शासन की ओर से जारी कार्यालय आदेशों के अनुसार अधिशासी अभियंता राजेश कुमार, सहायक अभियंता अमित त्यागी और कनिष्ठ अभियंता नवीन गैरोला को उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। शासन ने तीनों अधिकारियों के विरुद्ध अलग-अलग आदेश जारी करते हुए मामले को गंभीर प्रकृति का बताया है।

ये भी पढ़ें:  श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय का आईआईटी दिल्ली के साथ एमओयू


जांच में क्या निकला?

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पुल निर्माण के दौरान डिजाइन कंसल्टेंट द्वारा River Diversion Work का डिजाइन तैयार नहीं किया गया, जबकि यह कार्य परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसके अलावा नदी के River Bed के Cross Slope और उसकी Meandering Nature (प्राकृतिक घुमावदार बहाव) को ध्यान में रखते हुए आवश्यक River Training Measures भी नहीं अपनाए गए।

इन कमियों के कारण टौंस नदी का प्रवाह एक ओर केंद्रित हो गया। परिणामस्वरूप पुल के एबटमेंट (Abutment) के अपस्ट्रीम हिस्से में भारी स्कॉरिंग (Heavy Scouring) हुई और एप्रोच रोड के नीचे कैविटी (खोखलापन) बन गया। यही कारण रहा कि 31 जुलाई को हुई भारी बारिश के दौरान एप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गया।

ये भी पढ़ें:  श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने स्वाइन फ्लू के उपचार को कसी कमर

अधिकारियों पर क्यों हुई कार्रवाई?

जांच में पाया गया कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी कार्य की तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने और किसी भी तकनीकी कमी की जानकारी समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को देना था। लेकिन तीनों अधिकारियों ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया।

शासन ने अपने आदेश में कहा है कि यह कृत्य सरकारी कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, पर्यवेक्षण में शिथिलता और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर त्रुटि का परिचायक है। इससे न केवल शासन की छवि धूमिल हुई, बल्कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजना प्रभावित होने से आम जनता को भी परेशानी उठानी पड़ी।
निलंबन के दौरान रहेंगे ये नियम
निलंबन अवधि में तीनों अधिकारी प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग, देहरादून कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार केवल जीवन-निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें:  उत्तराखंड के Gen-Z) बना रहे हैं गढ़वाली फिल्म एकुली पराण,आज हुआ टाइटल पोस्टर रिलीज

अभी जांच जारी, और बढ़ सकती है कार्रवाई

शासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई कार्रवाई है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों, डिजाइन कंसल्टेंट या संबंधित एजेंसियों की भूमिका भी सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
धामी सरकार की इस कार्रवाई को सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी या एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *