September 19, 2026

उत्तराखंड के हरेला का संदेश यूरोप तक, पर्यावरण संरक्षण की मुहिम बनी वैश्विक अभियान

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उत्तराखंड के हरेला का संदेश यूरोप तक, पर्यावरण संरक्षण की मुहिम बनी वैश्विक अभियान

ऋषिकेश में अमर ज्योति बाल संस्थान के आयोजन में उत्तराखंड और यूरोप के विद्यार्थियों ने किया पौधारोपण, हिन्दी, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

ऋषिकेश। उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला ने इस बार सीमाओं को लांघते हुए यूरोप तक अपनी हरियाली का संदेश पहुंचाया। अमर ज्योति बाल संस्थान, ऋषिकेश में आयोजित भव्य कार्यक्रम में उत्तराखंड और यूरोप के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हरेला को केवल एक क्षेत्रीय लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और वैश्विक जनजागरण के अभियान के रूप में स्थापित करना था।

कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के संस्थापक रशमी कांत तथा बहुभाषी लेखक, समाजसेवी एवं शिक्षाविद् धर्मसिंह फरस्वाण के सौजन्य से किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पौधारोपण करते हुए अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।

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मुख्य वक्ता धर्मसिंह फरस्वाण ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वनों की अंधाधुंध कटाई, प्रदूषण और जैव विविधता के संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। यदि समय रहते प्रकृति संरक्षण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का हरेला केवल एक सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह पर्व पूरी दुनिया को संदेश देता है कि पेड़-पौधों का संरक्षण ही मानव सभ्यता के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने विश्व के सभी देशों से हरेला की भावना को अपनाते हुए व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाने और लगाए गए पौधों के संरक्षण का आह्वान किया।

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कार्यक्रम के दौरान धर्मसिंह फरस्वाण ने भारतीय भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अपनी रचित हिन्दी, अंग्रेज़ी एवं फ्रेंच भाषा सीखने संबंधी पुस्तकें विद्यार्थियों और शिक्षकों को भेंट कीं। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न देशों की संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जोड़ने वाला मजबूत सेतु है। उन्होंने यूरोप के विद्यार्थियों से हिन्दी सीखने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भारत की संस्कृति, साहित्य और परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा तथा भारत और यूरोप के बीच शिक्षा, शोध, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

अमर ज्योति बाल संस्थान के संस्थापक रशमी कांत ने कहा कि यदि विश्व का प्रत्येक नागरिक प्रतिवर्ष कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो करोड़ों नए वृक्ष पृथ्वी की हरियाली बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक देश या संस्था का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का साझा दायित्व है।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेते हुए अधिक से अधिक पौधारोपण करने, वृक्षों की रक्षा करने तथा हरेला के संदेश को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं आज वैश्विक स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा बन सकती हैं।

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