June 23, 2026

भाजपा विधायक ने राजनीतिक द्वेष में फंसाने का रचा षड्यंत्र हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सूरत सिंह नेगी का आरोप

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भाजपा विधायक ने राजनीतिक द्वेष में फंसाने का रचा षड्यंत्र हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद सूरत सिंह नेगी का आरोप

 

 

देहरादून। सामाजिक कार्यकर्ता एवं कांग्रेस नेता सूरत सिंह नेगी ने हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद भाजपा विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार वार्ता में नेगी ने कहा कि उन्हें राजनीतिक द्वेष के तहत एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत फंसाने का प्रयास किया गया, लेकिन न्यायालय में वास्तविक दस्तावेज और तथ्य सामने आने के बाद उन्हें राहत मिली।
नेगी ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमा तथ्यों के विपरीत था और इसे राजनीतिक दबाव में दर्ज कराया गया। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय के समक्ष सभी दस्तावेज प्रस्तुत होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रायपुर विधानसभा क्षेत्र में जनहित के मुद्दे उठाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया।

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उन्होंने भूमि रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार विनय खुराना द्वारा 2590 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई थी, जबकि दाखिल-खारिज में 3066 वर्गमीटर भूमि दर्ज हो गई। इसी प्रकार सुनयना खुराना द्वारा 2772 वर्गमीटर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई, लेकिन प्रारंभिक दाखिल-खारिज में उनके नाम केवल 2296 वर्गमीटर भूमि दर्ज की गई। नेगी का कहना है कि इन विसंगतियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।


उन्होंने बताया कि 21 फरवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी द्वारा संशोधित आदेश जारी किया गया था, जिससे भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो गई थी। इसके बावजूद राजस्व विभाग द्वारा आज तक आदेश को अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया। नेगी ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
सूरत सिंह नेगी ने कहा कि वर्ष 2021 में उन्होंने और मोहित पंवार ने लगभग सात बीघा भूमि खरीदी थी, लेकिन दाखिल-खारिज में उनके नाम 476 वर्गमीटर भूमि कम दर्ज की गई। उनका आरोप है कि विभागीय त्रुटियों और लापरवाही ने बाद में कई विवादों को जन्म दिया।
नेगी ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता द्वारा 23 मई 2026 को पुलिस को लिखित रूप से विवाद समाप्त होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद 10 जून 2026 को उनके और मोहित पंवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है और इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले में कथित रूप से गलत रिपोर्ट तैयार करने वाले राजस्व विभाग के कर्मचारियों, तथ्यों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों तथा बिना पर्याप्त आधार के कार्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कर उनके खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
रायपुर विधानसभा क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए नेगी ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
इस अवसर पर सूरत सिंह नेगी ने रायपुर विधानसभा क्षेत्र में व्यापक “न्याय यात्रा” निकालने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से जनता के सामने पूरे मामले के दस्तावेज, तथ्य और घटनाक्रम रखे जाएंगे तथा कथित अनियमितताओं को उजागर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति है और सत्य तथा न्याय की इस लड़ाई को किसी भी दबाव से रोका नहीं जा सकता।
पत्रकार वार्ता में पार्षद अमित भंडारी, पार्षद रोबिन त्यागी, पार्षद महेंद्र रावत, ब्लॉक अध्यक्ष सरिता बिष्ट, संजय उनियाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय प्रताप मल्ल, एडवोकेट चंद्र मोहन कंडारी, रिपुदमन सिंह, विजय गुप्ता, मनीष सेनन, अनीश उपाध्याय, विनीत प्रसाद भट्ट (बंटू), एडवोकेट निलय रत्न कुकरेती, देवानंद मैथानी, मिथिलेश उपाध्याय तथा पूर्व प्रधान राजेश डोगरा सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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