October 27, 2026

बड़ी खबर: भाजपा के 32 विधायकों के टिकटों पर लटकी तलवार: सूत्र

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बड़ी खबर: भाजपा के 32 विधायकों के टिकटों पर लटकी तलवार


दो तिहाई भाजपा विधायकों के टिकट पर लटकी तलवार, 32 विधायकों के खिलाफ नाराजगी: आंतरिक सर्वे

नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड भाजपा में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के चयन को लेकर बड़ा मंथन शुरू हो गया है। पार्टी और संघ की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में प्रदेश की 47 भाजपा सीटों का आकलन किया गया, जिसमें 32 मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर गहरी नाराजगी सामने आई है। रिपोर्ट के आधार पर माना जा रहा है कि करीब दो-तिहाई विधायकों के टिकट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि मौजूदा विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी का असर चुनावी परिणामों पर पड़े। ऐसे में जिन सीटों पर एंटी-इंकम्बेंसी अधिक है, वहां नए चेहरों को मौका देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उद्देश्य सत्ता विरोधी माहौल को कम करना और चुनावी बढ़त बनाए रखना है।

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सरकार नहीं, विधायकों के खिलाफ ज्यादा नाराजगी

सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि जनता में सरकार के कामकाज को लेकर अपेक्षाकृत कम असंतोष है, जबकि कई क्षेत्रों में स्थानीय विधायकों के प्रति नाराजगी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा सरकार के दस वर्षों में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन कई स्थानों पर स्थानीय संगठन की कमजोरी, आंतरिक गुटबाजी, प्रशासनिक ढिलाई और युवाओं की नाराजगी जैसे कारण विधायकों की छवि को प्रभावित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी के लिए सुरक्षित सीट पर भी मंथन

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी सुरक्षित विधानसभा सीट के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि मुख्यमंत्री ऐसी सीट से चुनाव लड़ें, जहां उन्हें अधिक चुनावी जोखिम न हो और वे पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रचार पर पूरा ध्यान दे सकें। गौरतलब है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, जिसके बाद उन्होंने चंपावत उपचुनाव जीतकर विधानसभा में वापसी की थी।

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कमजोर विपक्ष की धारणा से सतर्क भाजपा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल विपक्ष की कमजोरी के भरोसे चुनाव लड़ना उचित नहीं होगा। पार्टी का मानना है कि स्थानीय स्तर पर उम्मीदवारों के प्रति नाराजगी चुनावी परिणाम बदल सकती है। उदाहरण के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के कार्यकाल का हवाला देते हुए बताया गया है कि उस समय कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर होने के बावजूद स्थानीय असंतोष के कारण भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ी थी।

दो महीने तक चला फीडबैक अभियान

बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो महीनों में प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं, संगठन पदाधिकारियों, सामाजिक प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अलग-अलग माध्यमों से फीडबैक लिया गया। इसी आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी गई है।

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हारी हुई सीटों पर भी फोकस

सर्वे रिपोर्ट में पिछला चुनाव हार चुकी 23 सीटों में से 10 सीटों पर भाजपा की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर बताई गई है। इन सीटों पर संगठन को मजबूत कर जीत की रणनीति तैयार की जा रही है, जबकि कमजोर सीटों पर अलग से समीक्षा की जा रही है।
हालांकि, पार्टी की ओर से इस आंतरिक सर्वे या संभावित टिकट कटने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। फिलहाल संगठन स्तर पर रिपोर्ट के आधार पर चुनावी रणनीति और उम्मीदवार चयन को लेकर मंथन जारी है।

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