July 16, 2026

तो क्या दून मेडिकल कॉलेज में बदलने जा रहा निजाम! 

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तो क्या दून मेडिकल कॉलेज में बदलने जा रहा निजाम! 

डिप्टी एमएस डॉ. एनएस बिष्ट का इस्तीफा, चर्चाओं का बाजार हुआ गर्म 

 

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल) इन दिनों विवादों का अड्डा बना है। मेस घोटाला, आयुष्मान फर्जीवाड़ा और हर तरफ फैली अव्यवस्थाओं से शासन, मंत्री और मुख्यमंत्री तक असहज है। चर्चा ये है कि सबसे ज्यादा स्थिति खराब इसलिए है, क्योंकि यहां पर जिम्मेदारों का ध्यान काम से ज्यादा खींचतान और गुटबाजी पर है।

 

इसका नतीजा यह है कि यहां से डॉक्टरों का भी मोहभंग होता दिख रहा है। बीते महीने मेडिसिन विभाग से तीन डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया, जबकि कार्डियोलॉजी विभाग का एक चिकित्सक भी संस्थान छोड़ चुका है। वहीं सर्जरी विभाग में हालात ऐसे हैं कि पूरी व्यवस्था महज एक प्रोफेसर और एक सीनियर रेजिडेंट (एसआर) के भरोसे चल रही है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुविधाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

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कई बार ऐसे हालात बने कि मरीजों, तीमारदारों के साथ-साथ कर्मचारियों और मीडिया के लोगों को भी असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार और ग्रुपों में कई तरह की पाबंदियां लगाई गई।

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उधर, सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान योजना, मैस व्यवस्था और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। शासन स्तर पर भी व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी है। स्वास्थ्य मंत्री सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को फटकार और सख्त निर्देश दे चुके हैं। अब जल्द ही इन मामलों में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

 

अब सवाल केवल एक इस्तीफे का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही का है। यदि प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में तालमेल के बजाय टकराव की चर्चा हो, तो सबसे अधिक नुकसान मरीजों और आम जनता का होता है।

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समय आ गया है कि दून मेडिकल कॉलेज में ऐसा नेतृत्व आए जो व्यक्तिगत खेमेबाजी नहीं, बल्कि पारदर्शिता, अनुशासन और जनसेवा को प्राथमिकता दे। जनता को विवाद नहीं, बेहतर इलाज और बेहतर प्रशासन चाहिए।

 

सूत्र यहां तक बताते है कि मंत्री और शासन स्तर पर नाम तय हो चुके हैं। मुख्यमंत्री की मुहर लगते ही दो से तीन दिन में दून मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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