April 26, 2026

विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार: सुबोध उनियाल

0
IMG-20260102-WA0116

 

विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार: सुबोध उनियाल

*पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत करने वालों को सरकार देगी सुरक्षा, सभी जांच के लिए तैयार : सुबोध उनियाल*

बिना साक्ष्य, जांच की कोशिश, सजायाफ्ताओं को कानूनी फायदा पहुंचा सक सकती है!

 

देहरादून 2 जनवरी। कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने अंकिता प्रकरण विवाद पर स्पष्ट किया कि आरोप लगाने वाले या अन्य व्यक्ति, विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें, सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट, एसआईटी जांच को सही मानते हुए, सीबीआई जांच से इनकार कर चुकी है। लिहाजा सिर्फ अपुष्ट आरोप के आधार पर कार्रवाई हुई तो सजायाफ्ता दोषियों को कानूनी फायदा पहुंच सकता है।

पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए, श्री उनियाल ने कहा, बेटी के साथ हुई इस घटना से समूची देवभूमि दुखी थी। मामले को संवेदनशीलता और गंभीरता से लेते हुए, धामी सरकार ने तत्काल महिला डीआईजी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की और आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी फोरेंसिक और व्यवहारिक सबूतों को एकत्र किया गया और न्यायालय में मजबूती से पैरवी की गई। पीड़ित परिवार की सहमति से की गई इस तरह कार्रवाई की गई कि आरोपियों को जमानत तक नहीं लेने दी गई। इस सबके आधार पर दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई है।

ये भी पढ़ें:  Big breaking:राजाजी टाइगर रिजर्व के कोर जोन में उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री के बेटे की शादी पर विवाद, हरकत में आया विभाग, केस दर्ज

जहां तक सवाल है, सीबीआई जांच का तो, सरकार किसी भी जांच से गुरेज नहीं है, लेकिन विश्वसनीय साक्ष्य सामने तो आएं। उन्होंने आग्रह किया कि सोशल मीडिया में आरोप लगाने वाले व्यक्तियों से भी में विशेष अनुरोध है कि वे सामने आकर, साक्ष्य प्रस्तुत करें। सरकार उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगी, और उनके ही नहीं किसी अन्य पक्ष के पास भी कोई पुख्ता साक्ष्य हैं तो जांच एजेंसी को सौंपे। यदि उनमें थोड़ी सी भी सच्चाई पाई गई तो उसमें बड़ी से बड़ी जांच के लिए सरकार तैयार है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, प्रकरण की विवेचना के बाद जब एक पक्ष सीबीआई जांच की संस्तुति के लिए न्यायालय पहुंचा था। तो ट्रायल कोर्ट, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी एसआईटी द्वारा की गई कार्यवाही को सही और सक्षम मानते हुए किसी अन्य जांच से इनकार कर दिया था। तीनो न्यायालयो ने माना कि किसी भी वीआईपी को बचाने का कोई प्रयास नही किया गया है और विवेचना में कोई वीआईपी होना पाया भी नहीं गया। उपरोक्त केस की पैरवी ट्रायल कोर्ट में मृतिका के परिजनों की इच्छानुसार नियुक्त विशेष अभियोजन अधिकारी द्वारा की गई थी व उनके द्वारा वीआईपी व विवेचना के सम्बन्ध में कोई आपत्ति नही की गई थी।

ये भी पढ़ें:  एटीएस कॉलोनी के लोगों को परेशान करने के आरोपी बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर लगा गुंडा एक्ट, जिला बदर की तैयारी,

इसी तरह क्राइम सीन पर बुल्डोजर चलाने के आरोप पर स्पष्ट किया कि कोर्ट ने भी माना, मृतका के कमरे की तोड़ फोड़ से पूर्व ही एफएसएल टीम द्वारा सभी साक्ष्य इकट्ठा कर लिये थे। लिहाजा कहीं कहीं एक खास नजरिया स्थापित करने की दृष्टि से भी यह दुष्प्रचारित किया जा रहा है। वहीं विवेचना के दौरान कई बार आम जन से अपील की गई थी कि किसी के पास इस प्रकरण के सम्बन्ध में साक्ष्य हों तो उपलब्ध करायें और किसी के भी द्वारा कोई साक्ष्य नहीं दिये गये थे।

उन्होंने वर्तमान में सीबीआई जांच की मांग को लेकर उन्होंने पुनः स्पष्ट किया कि पुख्ता सबूत सामने आने पर सरकार किसी भी जांच के लिए तैयार है। लेकिन उससे पहले इस तरह का निर्णय, सजायाफ्ताओं को फायदा पहुंचा सकता है। क्योंकि आरोप लगाने वाले सोशल मीडिया ऑडियो वीडियो में दुखद मौत के कारण को लेकर दोहरी बयानबाजी की गई है, उसकी न्यायालय में प्रस्तुति, अभियुक्तों की जमानत का रास्ता भी खोल सकती है। लिहाजा कहीं न कहीं अन्य पक्षों द्वारा जा रही इस तरह की कोशिशें दोषियों को लाभ पहुंचाने की साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।वर्तमान में वायरल रिकार्डिंग में कोई समय और तिथि स्पष्ट नहीं है।
इसमें व्यक्ति द्वारा अंकिता की सुसाइड की बात कहना अभियुक्त को फायदा पंहुचाने की नीयत से कहा गया, ऐसा प्रतीत होता है। क्योकि अपराधी पूर्व में हत्या के आरोप मे सजा पा चुके हैं। मामला अभी अपील पर है, इस प्रकार के तथ्य लाना अभियुक्तों को फायदा पंहुचा सकता है।

ये भी पढ़ें:  Uttarakhand Board Exam Results: हाईस्कूल में अक्षत, इंटर में गीतिका और सुशीला बने टॉपर, लड़कियों का दबदबा कायम

जो फिलहाल रिकार्डिंग सामने आई है उसके किसी सुनियोजित तरीके से किए जाने की आशंका है और इसको जानबूझकर लीक करने की योजना मालूम पड़ती है। रिकार्डिंग में बिना किसी साक्ष्य के एक-दो लोगों का नाम बार-बार लिया जाना उन्हे व्यक्तिगत क्षति पंहुचाने का आशय प्रतीत होता है।

लिहाजा सरकार का मानना है कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है। इसलिए जब तक आरोप लगाने वाले व्यक्ति, कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं करते हैं तब तक जल्दबाजी में कुछ भी निर्णय करना, पूरी कानूनी प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। साथ ही आरोप लगाया कि बिना साक्ष्यों के जांच की बात करने वाले आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे अपराधियों बचाने का प्रयास कर रहे हैं ।

पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री  कुंदन परिहार, प्रदेश मीडिया प्रभारी  मनवीर सिंह चौहान, सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र नेगी, प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती कमलेश रमन भी मौजूद रही।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed