May 18, 2026

सीएम की विधानसभा चंपावत में दसवी की छात्रा से गैंग रेप, ऐसे में देवभूमि में महिलाएं कैसे होंगे सेफ: कांग्रेस

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सीएम की विधानसभा चंपावत में दसवी की छात्रा से गैंग रेप, ऐसे में देवभूमि में महिलाएं कैसे होंगे सेफ: कांग्रेस

देहरादून/चंपावत। देवभूमि उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। चंपावत में सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद विपक्ष ने हमला बोल दिया है।

चम्पावत की शांत वादियों में घटी दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे उत्तराखंड को शर्मसार कर दिया है। दोस्त की मेहंदी रस्म में गई 10वीं की एक छात्रा के साथ तीन युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

पीड़िता के पिता ने भाजपा मंडल उपाध्यक्ष, एक पूर्व प्रधान और एक छात्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी छात्र और पूर्व प्रधान चाचा-भतीजा हैं।

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नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि
घटना की क्रूरता यहीं समाप्त नहीं हुई। दुष्कर्म के बाद जब पीड़िता ने अपने घर फोन करने का प्रयास किया तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की, उसके हाथ-पैर बांध दिए और कमरे में ताला लगाकर फरार हो गए।
रात करीब डेढ़ बजे पीड़िता का एक फोन उसके घर पहुंचा, जिसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। संयुक्त अभियान चलाकर पुलिस ने छात्रा को बंद कमरे से बरामद किया।

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आर्य ने कहा कि यह घटना केवल एक बेटी के साथ अत्याचार नहीं, बल्कि उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब सत्ता से जुड़े लोग ही ऐसे जघन्य अपराधों में आरोपित हों, तब प्रदेश की माताएं-बहनें आखिर किस पर भरोसा करें?

भाजपा सरकार को जवाब देना होगा—

क्या यही है “बेटी बचाओ” का असली चेहरा?
क्या सत्ता संरक्षण के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं?
आखिर प्रदेश में बेटियां कब सुरक्षित होंगी?
हम मांग करते हैं कि—

सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर दोषियों को शीघ्र सख्त सजा दिलाई जाए।
पीड़िता एवं उसके परिवार को सुरक्षा और आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
दोषियों को राजनीतिक संरक्षण देने वालों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
उत्तराखंड की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। बेटियों की अस्मिता पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रदेश की हर बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस जिम्मेदारी से भागने का अधिकार किसी को नहीं है।

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