September 16, 2026

वैसे भारी तापमान, शासनादेश को ताक पर रखकर जनता को किया जा रहा जखोली तहसील में परेशान, नहीं बन रहे EWSप्रमाण पत्र

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रामरतन पंवार/जखोली

जखोली तहसील में शासनादेश ताक पर, EWS प्रमाण पत्र के नाम पर जनता को किया जा रहा परेशान

 

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के जखोली तहसील प्रशासन पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर आम जनता और बेरोजगारों को मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगे हैं। शासनादेशों को ताक पर रखकर राजस्व उपनिरीक्षकों (पटवारियों) द्वारा आय और संपत्ति के सत्यापन से पूर्व तकनीकी विभाग (JE) से भवन माप की आख्या मांगी जा रही है, जिससे आवेदकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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अधिनियम संख्या 7 (वर्ष 2019) की धारा 3 उपधारा (2) (ख) के अनुसार, EWS आरक्षण की पात्रता निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण और मापन का मूल कार्य राजस्व विभाग का है। पूरे अधिनियम में तकनीकी विभाग द्वारा सत्यापन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद जखोली तहसील द्वारा पूर्व में जारी प्रमाण पत्रों में भी नियम विरुद्ध तरीके से जेई की रिपोर्ट लगाई गई, जो सीधे तौर पर शासनादेश का उल्लंघन है। मामला तब उजागर हुआ जब जखोली विकासखंड में कार्यरत एक महिला अवर अभियंता की ड्यूटी भवन सत्यापन में लगाई गई, जिन्होंने उखीमठ तहसील से शासनादेश की प्रति लाकर जखोली तहसील को सौंपी।

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बैनोली के ग्राम प्रधान सूर्यप्रकाश नौटियाल ने बताया कि उनकी ग्राम पंचायत के एक आवेदक का मामला भी जेई रिपोर्ट के नाम पर लंबे समय तक अटकाए रखा गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही जिले की उखीमठ तहसील में शासनादेश लागू है, तो जखोली में इसे क्यों छुपाया गया? वहीं इस मामले पर जखोली के तहसीलदार कमलेश किरौला का तर्क है कि मकान की नाप-जोख की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए जेई से तकनीकी सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि पटवारी अपनी आख्या दे सकें। तहसील प्रशासन के इस अड़ियल रवैये से स्थानीय जनता और बेरोजगार युवाओं में भारी आक्रोश है।

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