September 30, 2026

9 जुलाई से प्रारंभ होगा “बीज बम अभियान सप्ताह–2026”

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 9 जुलाई से प्रारंभ होगा “बीज बम अभियान सप्ताह–2026”

वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री सुबोध उनियाल करेंगे बीज बम अभियान सप्ताह का शुभारंभ

उत्तराखंड से शुरू हुआ जन-अभियान अब देश के विभिन्न राज्यों तक पहुँचा।

पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि एवं जनसहभागिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 9 से 15 जुलाई 2026 तक “बीज बम अभियान सप्ताह–2026” का आयोजन किया जाएगा।

 

उत्तराखंड से प्रारंभ हुआ बीज बम अभियान आज देश के अनेक राज्यों तक पहुँच चुका है। विभिन्न प्रदेशों में स्थानीय जलवायु, भौगोलिक परिस्थितियों एवं उपलब्ध प्रजातियों के अनुसार लोग अपने-अपने स्तर पर इस अभियान को सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं। यह अभियान आज एक जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है, जिसमें हजारों पर्यावरण प्रेमी, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाएँ एवं सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं।

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यह अभियान केवल वृक्षारोपण नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, हरित एवं समृद्ध भविष्य का संकल्प है।

राज्य स्तर पर बीज बम अभियान सप्ताह–2026 का औपचारिक शुभारंभ 9 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के माननीय वन मंत्री  सुबोध उनियाल द्वारा उनके शासकीय आवास, यमुना कॉलोनी, देहरादून में किया जाएगा। इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बीज बम अभियान से जुड़े स्वयंसेवक उपस्थित रहेंगे। साथ ही उत्तराखंड के सभी जनपदों के वन अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे।

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*बीज बम बनाने की सरल विधि*

 

उपजाऊ मिट्टी एवं अच्छी गुणवत्ता वाले कम्पोस्ट को आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर अच्छी तरह गूंथ लें। इसके बाद उसका छोटा गोलाकार गोला बनाकर उसके भीतर स्थानीय जलवायु एवं क्षेत्र के अनुरूप दो उपयुक्त बीज रखें। तैयार बीज बमों को कम से कम चार दिनों तक छायादार स्थान पर अच्छी तरह सुखाएँ। पूरी तरह सूख जाने के बाद इन्हें पूर्व निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर रखें या बिखेर दें। वर्षा एवं अनुकूल वातावरण मिलने पर बीज स्वतः अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

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ध्यान दें: बीज बम की सफलता मुख्यतः उच्च गुणवत्ता वाले बीज, उपजाऊ मिट्टी एवं अच्छे कम्पोस्ट पर निर्भर करती है।

 

आइए, हम सभी बीज बम अभियान सप्ताह–2026 से जुड़ें और प्रकृति, पर्यावरण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपना अमूल्य योगदान दें।

 

 

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