July 28, 2026

विधानसभाध्यक्ष पर निर्दल विधायक को संरक्षण देने का आरोप – Sainyadham Express

0
RAIBAR PAHAD KA

 

विधानसभाध्यक्ष पर निर्दल विधायक को संरक्षण देने का आरोप

electronics

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद क्या फैसला लेगी स्पीकर खण्डूड़ी ?

तीन साल से विधायक उमेश कुमार की सदस्यता पर नहीं लिया फैसला-मोर्चा

संविधान के नियमों की उड़ा दी धज्जियां

 

विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने विधानसभाध्यक्ष श ऋतु खंडूरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार को संरक्षण देकर प्रदेश में माफियाराज को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि उक्त विधायक के खिलाफ विभिन्न राज्यों—उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल—में लगभग 30 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग, साजिश, ज़मीन कब्जा और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।

ये भी पढ़ें:  जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जिलाधिकारी ने सुनीं 164 शिकायतें

 

नेगी ने आरोप लगाया कि ऐसे दुराचारी और जालसाज विधायक के पक्ष में खड़े होकर विधानसभाध्यक्ष संविधान और नैतिकता दोनों का अपमान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में प्रदेश को शर्मसार करने वाले तथ्यों के बावजूद तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना मिलीभगत और राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करता है।

जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि 26 मई 2022 को रुड़की निवासी रविन्द्र पनियाला द्वारा विधानसभाध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए याचिका दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि विधायक ने निर्दलीय रूप से चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक दल की सदस्यता ली और अपनी अलग पार्टी बनाकर दल-बदल कानून का उल्लंघन किया है, जिससे उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए।

ये भी पढ़ें:  अवैध निर्माण पर एमडीडीए का एक्शन तेज, देहरादून और ऋषिकेश में दो निर्माण सील

नेगी ने कहा कि तीन साल बाद 7 मई 2025 को विधायक उमेश कुमार व याचिकाकर्ता रविन्द्र पनियाला को विधानसभा की ओर से नोटिस भेजा गया। स्पीकर की तीन साल से जारी चुप्पी पर कई सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्पीकर ने विधानसभा भर्ती घोटाले में दो सौ से अधिक तदर्थ कर्मियों को नौकरी से हटाने में कोई देरी नहीं लगाई। लेकिन तथ्य होने के बावजूद स्पीकर की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभाध्यक्ष किस भय या दबाव में काम नहीं कर रही हैं? यदि वे स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकतीं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय पहले ही इस विषय पर स्वतः संज्ञान ले चुका है और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी विधानसभाध्यक्षों द्वारा फैसले में देरी और संरक्षण देने पर कड़ी टिप्पणी की है।

ये भी पढ़ें:  मन की बात’ के 136वें संस्करण का हुआ सामूहिक श्रवण, संगठन की मजबूती और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

नेगी ने आरोप लगाया कि खंडूरी अपने पिता जनरल बीसी खंडूरी की नैतिकता और अनुशासन से कुछ नहीं सीख पाईं। उन्होंने कहा कि पूर्व में दल-बदल के मामलों में कई विधायकों को इस्तीफा देना पड़ा था, लेकिन इस मामले में निष्क्रियता दुर्भाग्यपूर्ण है।

मोर्चा ने इस गैर जिम्मेदाराना रवैये के खिलाफ इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि प्रदेश की छवि धूमिल करने वाले इस कृत्य के लिए विधानसभाध्यक्ष को जनता से माफी मांगनी चाहिए।

पत्रकार वार्ता में ठाकुर भाग सिंह और प्रवीण शर्मा पिन्नी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed