June 30, 2026

देवल गाँव मे आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर लम्बे समय तक रहेगा याद

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रामरतन पंवार /जखोली

 

देवल गाँव मे आयोजित यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर लम्बे समय तक रहेगा याद

 

देवभूमि उत्तराखंड की पहचान केवल उसके पर्वतों से नहीं, बल्कि उसकी सनातन परंपराओं, लोक संस्कृति और देव कार्यों से है। ग्राम देवल, लस्या पट्टी, जखोली में माँ भगवती राजराजेश्वरी के भव्य मंदिर का निर्माण और 24 से 27 जून 2026 तक सम्पन्न प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव इसका जीवंत उदाहरण है।

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भाई कमलेश उनियाल के नेतृत्व में हुए इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होता है, तो बड़े से बड़ा धार्मिक और सामाजिक कार्य भी अनुशासन, समर्पण और सेवा भाव से सफल बनाया जा सकता है।

 

इस महायज्ञ की सबसे प्रेरणादायक पहल रही वर्षों बाद अपनी धियाणियों को मायके बुलाकर उनका सम्मान करना। कई बहनों ने 35–40 वर्षों बाद अपने मायके की धरती पर कदम रखा। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि पलायन से बिखरते पारिवारिक और सांस्कृतिक रिश्तों को जोड़ने का भावनात्मक प्रयास भी था।

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आज जब कुछ विचारधाराएँ भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास करती हैं, तब ऐसे आयोजन यह संदेश देते हैं कि सनातन केवल आस्था नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, संस्कार देने और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है।

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माँ भगवती राजराजेश्वरी की कृपा सभी पर बनी रहे। ऐसे देव कार्य निरंतर होते रहें और हमारी संस्कृति सदैव अक्षुण्ण रहेl

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