भोग प्रधान होने पर परमात्मा से मनुष्यों की दूरी होती है जिसने सत्य को नही पहचाना जीवन मे वह भारी सुंदर मनमोहक वस्तुओं का परित्याग नही कर सकता जीवन को सफल बनाने वाला मनुष्य परम् लक्ष्य को प्राप्त करता है जीवन की उदंडता व्यक्ति को स्व व स्वजनों से दूरी करवाती है यह बात आज शिव मंदिर गढ़वाल सभा में महिला कल्याण समिति के द्वारा आयोजित शिवमहापुराण कथा में व्यक्त करते हुए ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने व्यक्त करते हुए कहा जीवन मे मनुष्य आसक्ति रहित कर्म में वर्ताव करता है स्वभाव सुविचार की सुगंध जब आ जाये जीवात्मा परमात्मा का खिंचाव होता है सुधार मनुष्य में जब होता है तो वैश्वानर नाम की अग्नि तथा अंतर बाह्य की प्रविर्ती मिट जाती जाती आसक्ति रहित व्यक्ति भगवान शिव को पृय है तुलसी को कही विमारियों का उपचार बताया नारी का अस्थिति पुरूष तथा समाज मानव की आधार नारी बताया बच्च्चों स्क्रीन बनाओ सब की चरण छूने की आदत मे ढालना जो पडोस के ही लोगों को नमस्कार नही करते वह संस्कार हीन हैं इसमें माता पिता दोषी जिन्होने अपने बच्चे को चरण झूमे आदत में ढाला वहीं महापौर सुनील उनियाल गामा जी नें समाजिक कुरीतियों को दूर करना अपनें और अपनें धर्म की पहचान होती है पुरानो से तीर्थ एकता के प्रतीक हैं इनको अपनी पहचान बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण सामाजिक मानसिक प्रदूषण से भी दूर रहना है आज महापौर सुनील उनियाल गामा जी सन्तोष गरोला गोपाल रतुडी हर्ष बर्धन खण्डूरी शकुन्तला ममगांई आयुषी ममगांई आयुष ममगांई
अध्तक्ष लक्ष्मी बहुगुणा सुजाता पाटनी महासचिव, सरस्वती रतूड़ी देवेश्वरी बम्पाल रेखा बडोनी रोशनी सकलानी मंजू बडोनी आशा रावत राजेश्वरी चमोली आचार्य दामोदर सेमवाल आचार्य संदीप बहुगुणा आचार्य दिवाकर भट्ट आचार्य अजय जुयाल सुषमा थपलियाल गिता काला नन्दा तिवारी लक्ष्मी गैरोला चन्दा बडोनी अनिता भट्ट दीपक उनियाल